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हम कहाँ जा रहे हैं पता नहीं .....इसे खोजने की एक कोशिश

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विशेष दर्जा पर योजना क्या ?

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जनता दल यू के लोग बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए दिल्ली में अधिकार रैली के लिए घूम – घूम कर सभा भी कर रहे हैं । दावा किया जा रहा हैं कि विशेष दर्जा प्राप्त होने के बाद राज्य का पिछड़ापन खत्म हो जाएगा । मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भी यही कहा है पर ये लोग ये स्पष्ट नहीं कर रहे हैं कि विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त होने के बाद इनके पास ऐसा कौन सा प्लान है जिसके क्रियान्वयन से राज्य का पिछड़ापन दूर हो जाएंगा ? यह ठीक है कि एक विशेष पैकेज मिल जाएंगा लेकिन पैसा मिल जाना ही विकास का मापदंड है या कोई प्लानिंग भी होनी चाहिए ? मेरा क्या सभी लोगों का मानना है कि किसी भी कार्य के सुपरिणाम तक पहुँचने के लिए एक रूपरेखा का होना जरूरी है जो इन लोगों के पास नहीं है । अपने यहाँ एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि हम मुद्दे को लेकर आंदोलन तो करते हैं पर आंदोलन की सफलता के बाद हम क्या करेंगे इसकी कोई ठोस योजना अपने पास नहीं रहती । भारत की आजादी के पूर्व अपने पास सिर्फ एक लक्ष्य था भारत को आज़ाद कराना एक पूरा समाज इस पुनीत कार्य में लगा था पर जब पुछा जाता था कि आजादी के बाद ? तो जवाब रहता पहले आजादी तो प्राप्त कर लें फिर बैठकर रूपरेखा भी बना लेंगे । जुनून ने ये काम कर दिया । आजादी मिल गई । पर भारत , भारत नहीं रहा इसका अपना मोलिक संविधान भी नहीं रहा । कई देशों के संविधान के टुकड़ों को जोड़कर अपना संविधान बना दिया गया । देश विकास करे इसका देशी मॉडल रहते हुए विदेशी मॉडल को अपना लिया गया और यह कहा गया कि अभी इसकी आवश्यकता है , यानि अपने संसाधनो की तलाश कर उसके आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार न करके ओद्योगिक विकास की कल्पना ही नहीं गई बल्कि उसको साकार रूप भी दे दिया गया । जो इस देश के अनुकूल नहीं था । द्वितीय पंचवर्षीय योजना में कृषि योग्य जमीन पर यह कहकर कि ये कृषि योग्य नहीं है उसपर बड़े उद्योग स्थापित कर दिये गए । इसकी कोई रूपरेखा नहीं तैयार हुई , आनन – फानन में ये सारा कार्य हुआ । नतीजा अपने सामने है कि कृषि योग्य जमीन तो समाप्त तो हुई ही साथ ही ये सारे उद्योग भी धीरे – धीरे बंद हो गए या बंद होते जा रहे हैं । ये सब प्लानिंग के अभाव के कारण हुआ है । आंदोलन तो अपना मकसद नहीं मकसद तो आंदोलन के जरिये विकास करना है और विकास कैसे करना है इसकी योजना और क्रियान्वयन की ब्लू प्रिंट तैयार करना है , लेकिन ऐसा तब भी नहीं हुआ था और आज भी नहीं हो रहा है । दिल्ली में आयोजित रैली के माध्यम से अधिकार प्राप्त करना है पर अधिकार प्राप्त कर क्या करना है इसका ब्लू प्रिंट / एक्शन प्लान भी सामने आना था । अधिकार तो राजनीतिक पार्टियां चुनाव में भी प्राप्त कर लेती हैं पर अधिकार मिलने के बाद अपने चुनावी घोषणा पत्र को भूल जाती हैं । उसका कुछ नहीं हो पाता तो इसका क्या होगा , कुछ तो स्पष्ट होना चाहिए अन्यथा , पिछड़ापन दूर हो जाएगा कह देने मात्र से राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त हो जाने के बाद भी शायद पिछड़ापन दूर होना संभव नहीं है । बस इतना होगा कि हमने दिल्ली तक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी , इस उपलब्धि से ही संतोष करना पड़ेगा और शायद इस आरोप को भी झेलना पड़ेगा कि सरकार ने जनता को वास्तविक मुद्दों से हटा कर विशेष दर्जे के अधिकार की लड़ाई में उलझा दिया ।

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 19, 2013

आंदोलन तो अपना मकसद नहीं मकसद तो आंदोलन के जरिये विकास करना है और विकास कैसे करना है इसकी योजना और क्रियान्वयन की ब्लू प्रिंट तैयार करना है , लेकिन ऐसा तब भी नहीं हुआ था और आज भी नहीं हो रहा है । दिल्ली में आयोजित रैली के माध्यम से अधिकार प्राप्त करना है पर अधिकार प्राप्त कर क्या करना है इसका ब्लू प्रिंट / एक्शन प्लान भी सामने आना था । अधिकार तो राजनीतिक पार्टियां चुनाव में भी प्राप्त कर लेती हैं पर अधिकार मिलने के बाद अपने चुनावी घोषणा पत्र को भूल जाती हैं । उसका कुछ नहीं हो पाता तो इसका क्या होगा , कुछ तो स्पष्ट होना चाहिए अन्यथा , पिछड़ापन दूर हो जाएगा कह देने मात्र से राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त हो जाने के बाद भी शायद पिछड़ापन दूर होना संभव नहीं है । ये एक वोट पाने का बढ़िया और सार्थक ड्रामा था जो कुछ ह्हद तक सफल रहा

Rachna Varma के द्वारा
March 19, 2013

सुधीर जी सिर्फ राजनीति और राजनीति इसके सिवा कुछ नहीं अपने राज्यों की देखभाल करने लायक ये मुख्यमंत्री लोग हो जाये तो आधी समस्या तो वैसे ही खत्म हो जाएगी किस तरह से अपने राज्य का विकास करना है इस पर बैठ कर कोई चर्चा नहीं होती चुनाव जीतने के लिए सिर्फ प्लानिंग करने आता है एक बढ़िया लेख |

    March 19, 2013

    सही कहा आपने आदरणीय रचना जी । सार्थक एवं प्रेरक प्रतिक्रिया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 19, 2013

आदरणीय सिन्हा साहब जी सादर अभिवादन आपसे सहमत हूँ बधाई.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 18, 2013

मान्य sudheer जी , नमस्कार !…….सार्थक और सच कहा है आप ने ! मुझे तो एक शगूफा से आगे और कुछ नहीं लगता ! बधाई !!

jlsingh के द्वारा
March 18, 2013

आदरणीय सुधीर जी, सादर अभिवादन! आपकी विस्तृत विवेचना का मैं स्वागत करता हूँ. दिक्कत तो इसी बात का है की सभी दल और उनके महत्वाकांक्षी लोग अपना दायरा बढ़ाकर अपने कद की ऊंचा कर दिखाना चाहते हैं. इनमे सबके निहित स्वार्थ हैं. नीतीश कुमार की पिछले सालों में की गयी यात्राओं और रैलियों में के खर्चों को अन्यविकास मद में खर्च किया जाता तो राज्य का बहुत ही भला हो जाता! पर इससे उनका भला या भविष्य कहाँ बनता? अभी तो अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए यह सब कर रहे हैं. या जनता को मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए!

rajeshkumarsrivastav के द्वारा
March 18, 2013

सुधीर जी नमस्कार विशेष राज्य का दर्जा महज एक राजनीती के सिवाय कुछ नहीं / प्रकृति ने ही बिहार की भूमि को विशेष राज्य बनाया है / यहाँ की उपजाऊ भूमि, यहाँ का ब्रेन, यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, यहाँ के परिश्रमी लोग, यंहा का दर्शन बाकि सभी राज्यों से अलग है / यहाँ देवता भी आकर अपने को धन्य समझते होंगे / यदि इन्ही संसाधनों का सही उपयोग किया जाय तो यह राज्य आदर्श राज्य बन जायेगा / केंद्र के सामने गिडगिडाने से अच्छा है की बिहार की खोई प्रतिष्ठा को वापस लौटने के लिए बिहार का संसाधन और बिहारियों का ही सही उपयोग किया जाय /

nishamittal के द्वारा
March 18, 2013

सिं हा साहब सब राजनीति के दांव पेंच हैं आखिर मोदी विरोध के लिए शक्ति प्रदर्शन ,विशेष दर्जा माँगना कांग्रेस इस समय देगी भी सब का स्वार्थ है

Sushma Gupta के द्वारा
March 17, 2013

सुधीर जी ,आपकी बात से मेरी सहमती है कि केवल अधिकारों की बात करने से तो किसी भी राज्य का सही मायने में विकास संभव नहीं ,मेरे विचार से तो जनता को गुमराह करने की ही राजनीति है ,जैसा कि चुनावों से पहले केवल चुनावी बादों की परम्परा है ..वाकी तो आने बाला समय ही वतायेगा .समसामयिक आलेख द्वारा जनता को सजग करने हेतु वधाई..


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